Thursday, June 18, 2026

संतोष गंगवार की बेटी को मैदान में उतर सकती है भाजपा, मुस्लिम वोटो पर भी नजर

बहेड़ी से संतोष गंगवार की बेटी श्रुति को मैदान में उतार सकती है भाजपा, मुस्लिम वोटों पर भी नजर,,

शाहिद/यूपी हेड

रिपोर्ट/अमन

बरेली जनपद की बहेड़ी विधानसभा सीट को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां लगातार तेज होती जा रही हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी इस बार बड़ा और चौंकाने वाला दांव खेल सकती है। चर्चाएं हैं कि झारखण्ड के राज्यपाल और बरेली की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले संतोष गंगवार की बेटी को भाजपा बहेड़ी से चुनावी मैदान में उतार सकती है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन संगठन के भीतर चल रही बैठकों, फीडबैक और स्थानीय गतिविधियों ने इस संभावना को काफी मजबूत कर दिया है।बहेड़ी विधानसभा क्षेत्र सामाजिक और जातीय समीकरणों के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी काफी प्रभावशाली है, जो चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संतोष गंगवार की बेटी को उम्मीदवार बनाए जाने की स्थिति में भाजपा को न केवल परंपरागत समर्थकों का फायदा मिल सकता है, बल्कि मुस्लिम वोटों का भी एक हिस्सा पार्टी की ओर आकर्षित हो सकता है। क्षेत्र में गंगवार परिवार की छवि एक सुलझे हुए, संवादप्रिय और विकास से जुड़े राजनीतिक परिवार की रही है, जिसका असर समुदायों के बीच देखने को मिलता है।सूत्र बताते हैं कि संतोष गंगवार के कार्यकाल के दौरान कई मौकों पर मुस्लिम समाज से जुड़े लोगों से संवाद और विकास कार्यों को प्राथमिकता दी गई, जिससे आज भी उनके प्रति एक वर्ग में सकारात्मक सोच मौजूद है। इसी आधार पर भाजपा यह आकलन कर रही है कि उनकी बेटी के मैदान में उतरने से मुस्लिम मतदाताओं में पूरी तरह विरोध की स्थिति न बनकर, समर्थन या कम से कम नरम रुख देखने को मिल सकता है। खासकर युवा और पढ़े-लिखे मुस्लिम वोटरों में विकास, शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।भाजपा के भीतर यह भी चर्चा है कि महिला उम्मीदवार होने के नाते संतोष गंगवार की बेटी को महिलाओं और अल्पसंख्यक महिलाओं के बीच भी स्वीकार्यता मिल सकती है। बहेड़ी क्षेत्र में महिला मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं और पार्टी इस वर्ग को साधने की रणनीति पर भी काम कर रही है। यही वजह है कि यह संभावित प्रत्याशी भाजपा के लिए सामाजिक संतुलन और राजनीतिक विस्तार—दोनों का माध्यम बन सकती है।उधर, इस सियासी चर्चा ने विपक्षी दलों की बेचैनी बढ़ा दी है। समाजवादी पार्टी, बसपा और कांग्रेस जैसे दल बहेड़ी में मुस्लिम वोट बैंक को अपनी मजबूती मानते रहे हैं, लेकिन यदि भाजपा इस सीट पर सामाजिक समीकरण साधने में सफल होती है तो मुकाबला बेहद दिलचस्प हो जाएगा। विपक्षी खेमे में भी उम्मीदवार चयन और रणनीति को लेकर मंथन तेज हो गया है।फिलहाल भाजपा संगठन स्तर पर जमीनी रिपोर्ट, कार्यकर्ताओं की राय और विभिन्न समुदायों से मिलने वाले संकेतों का आकलन कर रही है। अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा, लेकिन जिस तरह से संतोष गंगवार की बेटी के नाम को लेकर चर्चाएं तेज हैं, उससे साफ है कि बहेड़ी की राजनीति आने वाले दिनों में और गरमाने वाली है। अब सबकी निगाहें भाजपा के आधिकारिक ऐलान पर टिकी हैं, जो बहेड़ी के सियासी समीकरणों की दिशा तय करेगा।

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