
शाहिद/यूपी हेड
रिपोर्ट/अमन
उत्तराखंड में तीन साल पहले हुए अंकिता भंडारी हत्याकांड ने एक बार फिर सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। हाल ही में सामने आए एक वायरल वीडियो के बाद यह मामला दिल्ली से देहरादून तक चर्चा का विषय बन गया है। वीडियो सामने आते ही भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं।
यह विवाद तब तेज हुआ जब भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी ने फेसबुक लाइव के जरिए अंकिता भंडारी हत्या मामले में एक वीआईपी का नाम लिए जाने का दावा किया। वीडियो में उन्होंने कहा कि हत्या के दिन एक वीआईपी, जिसे ‘गट्टू’ कहा गया है, घटनास्थल पर मौजूद था और वह भाजपा का बड़ा नेता है। इसके साथ ही एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य का भी उल्लेख किया गया। वीडियो में एक कथित ऑडियो का जिक्र करते हुए कहा गया कि उस व्यक्ति के पास पूरे मामले की अहम जानकारी है।
वीडियो वायरल होते ही कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि राज्य सरकार सच्चाई को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि दस दिनों के भीतर सीबीआई जांच की सिफारिश नहीं की गई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
वहीं भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि वह जिस वीआईपी की बात कर रही है, वह कौन है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव से पहले इस संवेदनशील मामले को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। भाजपा का कहना है कि वायरल वीडियो छेड़छाड़ किया हुआ है और इसे लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है।
इस बीच भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर ने भी सामने आकर वायरल ऑडियो को फर्जी बताया है। उन्होंने ज्वालापुर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराते हुए ऑडियो की फोरेंसिक जांच की मांग की है। राठौर का कहना है कि यदि जांच में उनके खिलाफ कोई भी ठोस साक्ष्य सामने आता है तो वे सजा भुगतने के लिए तैयार हैं।
गौरतलब है कि 18 सितंबर 2022 को पौड़ी जिले के वनंत्रा रिजॉर्ट में काम करने वाली रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या कर उसका शव चीला शक्ति नहर में फेंक दिया गया था। एक सप्ताह बाद शव बरामद हुआ था। एसआईटी जांच के बाद रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और दो अन्य कर्मचारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। अंकिता ने अपने मित्र को बताया था कि उस पर एक वीआईपी को “अतिरिक्त सेवा” देने का दबाव बनाया जा रहा था, लेकिन उस वीआईपी की पहचान आज तक सार्वजनिक नहीं हो सकी है।
वायरल वीडियो के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर अंकिता मामले में बताए गए वीआईपी का सच क्या है और क्या इस हत्याकांड की निष्पक्ष जांच पूरी हो पाई है।
