Thursday, June 18, 2026

बरेली बस स्टैंड बना ‘डेथ ट्रैप’: खुले नाले ने ली युवक की जान, 30 घंटे चला रेस्क्यू

बरेली बस स्टैंड बना ‘डेथ ट्रैप’: खुले नाले ने ली युवक की जान, 30 घंटे चला रेस्क्यू

सिस्टम की लापरवाही या ‘मौत की साजिश’? खुले नाले में समा गया युवक, 30 घंटे बाद मिला शव

50 हजार यात्रियों के बीच ‘खुला मौत का गड्ढा’: बरेली में युवक की दर्दनाक मौत

एक स्लैब की कीमत एक जान! बरेली बस स्टैंड हादसे ने खोली सिस्टम की पोल

बरेली में ‘मौत का नाला’: बस पकड़ने आया युवक बना लापरवाही का शिकार

सिस्टम की नींद ने ली जान, बरेली बस अड्डा बना मौत का जाल

रिपोर्ट : शाहिद

बरेली! उत्तर प्रदेश के बरेली से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। भीड़भाड़ वाले सेटेलाइट बस स्टैंड पर एक खुला नाला एक युवक की मौत की वजह बन गया। हरदोई निवासी 30 वर्षीय तौहीद बस पकड़ने आया था, लेकिन उसे अंदाजा भी नहीं था कि यह सफर उसकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।

भीड़ के बीच ‘मौत का जाल’

मंगलवार रात करीब 9:30 बजे बस स्टैंड पर अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक तौहीद खुले नाले में जा गिरा। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव और गंदगी से भरे नाले ने कुछ ही सेकंड में उसे निगल लिया।

30 घंटे चला हाई-वोल्टेज रेस्क्यू

घटना के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। पुलिस, नगर निगम, NDRF और SDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं। रातभर जेसीबी मशीनों से कचरा हटाया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली।

करीब 30 घंटे की जद्दोजहद, 5 जेसीबी, 80 मजदूर और भारी मशीनरी के बाद गुरुवार तड़के 3 बजे युवक का शव नाले से बरामद किया गया।

आधार कार्ड बना पहचान का सहारा

मृतक की पहचान उसकी जेब से मिले आधार कार्ड से हुई। तौहीद हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र का रहने वाला था। पुलिस ने परिजनों को सूचना दे दी है।

एक साल से खुला था ‘मौत का दरवाजा’

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस नाले में तौहीद गिरा, उसका स्लैब करीब एक साल पहले टूट चुका था। परिवहन विभाग ने नगर निगम को कई बार पत्र लिखे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

हर दिन करीब 50 हजार यात्री और 500 बसें इस रास्ते से गुजरती हैं—इसके बावजूद यह ‘डेथ ट्रैप’ खुला रहा।

सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

इतनी बड़ी घटना के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी इसे “सिर्फ हादसा” बता रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि…….

क्या एक साल तक स्लैब न लगाना लापरवाही नहीं?

क्या हजारों यात्रियों की सुरक्षा की कोई कीमत नहीं?

क्या इस मामले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?

प्रशासनिक लापरवाही या ‘सिस्टम फेल’?

यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी नाकामी को उजागर करती है। अगर समय रहते नाले को ढक दिया जाता, तो शायद तौहीद आज जिंदा होता।

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