Thursday, June 18, 2026

इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: घर में नमाज़ की इजाजत, भीड़ जुटाने पर रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: घर में नमाज़ की इजाजत, भीड़ जुटाने पर रोक

रिपोर्ट/शाहिद

बरेली आवला नमाज़ प्रकरण में DM-SSP को राहत, अवमानना कार्यवाही समाप्त

बरेली/प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निजी आवास में नमाज़ पढ़ने को लेकर चल रहे संवेदनशील मामले में अहम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति अपने घर में नमाज़ अदा कर सकता है, लेकिन वहां बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

यह फैसला धार्मिक स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था के संतुलन को ध्यान में रखते हुए दिया गया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संविधान के तहत हर व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार सार्वजनिक शांति और व्यवस्था को प्रभावित नहीं करना चाहिए।

बेंच बदली, फैसले में आंशिक संशोधन मामले की सुनवाई के दौरान बेंच में बदलाव किया गया, जिसके बाद पहले दिए गए आदेश में आंशिक संशोधन किया गया। नई बेंच ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए यह स्पष्ट किया कि प्रशासन की भूमिका शांति बनाए रखने की है, न कि व्यक्तिगत धार्मिक गतिविधियों में अनावश्यक हस्तक्षेप करना।

DM और SSP पर से अवमानना कार्यवाही खत्म
बरेली के आवला क्षेत्र के मोहम्मदगंज नमाज़ प्रकरण में बड़ी राहत देते हुए कोर्ट ने अनुराग आर्य (एसएसपी बरेली) और अविनाश सिंह (जिलाधिकारी बरेली) के खिलाफ चल रही अवमानना कार्यवाही को समाप्त कर दिया है।

गौरतलब है कि इससे पहले हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों को तलब किया था और उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की गई थी। अब कोर्ट के ताजा आदेश के बाद दोनों अधिकारियों को राहत मिल गई है।

प्रशासन को दिए गए स्पष्ट निर्देश
कोर्ट ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को निर्देश देते हुए कहा कि: किसी भी क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए
यदि भीड़ के कारण तनाव की स्थिति बनती है तो प्रशासन तुरंत कार्रवाई करे धार्मिक गतिविधियों के नाम पर सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती क्या है पूरा मामला
बरेली जिले के आवला थाना क्षेत्र के मोहम्मदगंज गांव में निजी घर में सामूहिक नमाज़ पढ़े जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। स्थानीय प्रशासन द्वारा हस्तक्षेप के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। याचिका में धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला दिया गया, जबकि प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाया।

कोर्ट का संतुलित रुख
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि:
निजी स्तर पर धार्मिक पूजा या नमाज़ पर कोई रोक नहीं है. लेकिन सार्वजनिक स्वरूप या भीड़ जुटाने से शांति व्यवस्था बिगड़ सकती है.

ऐसे मामलों में प्रशासन को विवेकपूर्ण और संवेदनशील तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए
यह फैसला आने वाले समय में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी दिशा-निर्देश माना जा रहा है, जहां धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है।

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