बरेली में जीएसटी के नाम पर बड़ा खेल, शासन की नजर पढ़ते ही खुल सकती है पोल
TALK 24 विनय कुमार पांडे
बरेली में GST के नाम पर बड़ा खेल? शासन की नजर पड़ते ही खुल सकती हैं कई परतें
फर्जी फर्मों और बोगस ITC के मामलों में लगातार कार्रवाई, अब विभागीय कार्यप्रणाली पर भी उठ रहे सवाल
मोबाइल कारोबारी पर पड़ा था 2 लाख का दंड उसके बाद भी सोशलमडिया पर तेजी से हो रहा है वायरल:सूत्र
बरेली। जिले में जीएसटी से जुड़े फर्जीवाड़े और कर चोरी के मामले लगातार सामने आने के बाद एक बार फिर राज्य कर विभाग की कार्यप्रणाली चर्चा में है। बरेली में पिछले कुछ महीनों में फर्जी फर्मों, फर्जी बिलों और बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के जरिए कथित जीएसटी धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं। जुलाई में पुलिस ने 118 करोड़ रुपये के कथित GST फर्जीवाड़े के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
अगस्त में 100 करोड़ रुपये से अधिक के कथित जीएसटी फर्जीवाड़े के मामले में एसआईटी की कार्रवाई में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी की खबर सामने आई। जांच में फर्जी फर्मों और बोगस ITC के इस्तेमाल की बात सामने आई थी।
इसके बाद सितंबर में भी प्रेमनगर क्षेत्र में फर्जी फर्म के जरिए 87.04 लाख रुपये की कथित जीएसटी चोरी का मामला सामने आया, जिसमें दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की जानकारी पुलिस ने दी।
अब सवाल—स्थानीय स्तर पर हो रही कथित सेटिंग की जांच कब?
स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि कुछ संस्थानों पर कार्रवाई के बाद मामलों को कथित रूप से आर्थिक लेनदेन के जरिए निपटाने का प्रयास किया जाता है। दो लाख रुपये में मामला रफा-दफा किए जाने का दावा भी सामने आया है, लेकिन इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसकी जांच और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।
बरेली मंडल में पहले भी फर्जी फर्मों और ITC से जुड़े मामलों में कई एफआईआर और गिरफ्तारियां सामने आ चुकी हैं। मई की एक रिपोर्ट में मंडल में एक साल के दौरान 22 एफआईआर और 13 गिरफ्तारियों का उल्लेख किया गया था।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या जीएसटी विभाग फर्जी फर्मों के साथ-साथ उन लोगों और संस्थानों की भी जांच कर रहा है, जिनके जरिए कथित तौर पर यह पूरा नेटवर्क संचालित होता है? बाहर के लोगों द्वारा बरेली में आकर फर्जी फर्म या बिलिंग नेटवर्क चलाने के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की जरूरत है।
शासन और उच्चाधिकारियों से मांग है कि बरेली में पिछले कुछ समय में हुई जीएसटी कार्रवाइयों, फर्जी फर्मों, ITC क्लेम, टैक्स चोरी और कथित समझौतों की स्वतंत्र जांच कराई जाए। यदि कहीं नियमों के विपरीत कार्रवाई या आर्थिक लेनदेन के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जाए।
नोट: इस खबर में “दो लाख में मामला रफा-दफा” संबंधी बात को आरोप/दावे के रूप में रखा गया है; इसकी पुष्टि के लिए विभाग और संबंधित संस्थान का पक्ष लेना जरूरी है।