UPI पर MDR की नई व्यवस्था को लेकर ऐरन दंपती ने उठाए सवाल

Sep 19, 2026 - 17:00
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UPI पर MDR की नई व्यवस्था को लेकर ऐरन दंपती ने उठाए सवाल

UPI पर MDR की नई व्यवस्था को लेकर ऐरन दंपती ने उठाए सवाल

TALK 24 शाहिद बेग यूपी हेड 

₹2 हजार से ऊपर डिजिटल भुगतान पर 0.4% शुल्क का मुद्दा गरमाया, प्रवीण-सुप्रिया ऐरन ने पीएम-सीएम को भेजे पत्र

बरेली, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाली यूपीआई व्यवस्था में ₹2,000 से अधिक के निर्धारित व्यापारी लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर सियासी बहस तेज होती नजर आ रही है। पूर्व सांसद एवं पूर्व मंत्री प्रवीण सिंह ऐरन और पूर्व मेयर सुप्रिया ऐरन ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अलग-अलग पत्र भेजे हैं। दोनों नेताओं ने एमडीआर व्यवस्था पर पुनर्विचार करने और छोटे एवं मध्यम व्यापारियों को अतिरिक्त आर्थिक भार से बचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की मांग की है।

प्रवीण सिंह ऐरन और सुप्रिया ऐरन का कहना है कि आम नागरिक और छोटे कारोबारी पहले ही महंगाई, करों और विभिन्न शुल्कों के दबाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान से जुड़ी अतिरिक्त व्यापारी लागत का असर कारोबार की लागत और अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

छोटे दुकानदार पर पड़ेगा कितना असर, उठाया सवाल

दोनों नेताओं ने कहा कि बड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों और छोटे दुकानदारों की आर्थिक क्षमता एक जैसी नहीं है। बड़े कारोबार अतिरिक्त लागत को कई स्तरों पर समायोजित कर सकते हैं, जबकि छोटा व्यापारी सीमित पूंजी और कम लाभ मार्जिन में अपना कारोबार चलाता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लेन-देन पर एमडीआर लागू होगा, उनकी लागत आखिरकार कौन वहन करेगा। यदि व्यापारी खुद यह खर्च उठाता है तो उसके मुनाफे पर असर पड़ सकता है और यदि इसे व्यावसायिक लागत में शामिल किया जाता है तो इसका अप्रत्यक्ष असर कीमतों पर पड़ने की आशंका है।

96 फीसदी P2M लेन-देन प्रभावित नहीं होने का दावा

ऐरन दंपती ने कहा कि सरकार के अनुसार ₹2,000 तक के व्यापारी यूपीआई भुगतान और कुछ छोटे व्यापारियों के लेन-देन पर शून्य एमडीआर रहेगा तथा करीब 96 प्रतिशत पी2एम यानी व्यक्ति से व्यापारी को होने वाले लेन-देन इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे। इसके बावजूद उनका कहना है कि जिन लेन-देन पर शुल्क लागू होगा, उनके आर्थिक प्रभाव पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एमडीआर को सरकारी टैक्स नहीं कहा जा रहा है। यह भुगतान व्यवस्था से जुड़ी व्यापारी लागत है। उनका सवाल इस लागत के संभावित आर्थिक प्रभाव को लेकर है।

‘UPI का विरोध नहीं, अतिरिक्त बोझ पर सवाल’

प्रवीण सिंह ऐरन ने कहा कि यूपीआई या डिजिटल भुगतान व्यवस्था का विरोध नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बजाय ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे छोटे दुकानदारों की लागत न बढ़े।

उन्होंने कहा कि विपक्ष का दायित्व है कि आम नागरिक और व्यापारियों से जुड़े आर्थिक मुद्दों को सरकार के सामने मजबूती से रखा जाए।

सुप्रिया ऐरन ने कहा कि महंगाई और विभिन्न करों-शुल्कों के दबाव में आम परिवार पहले से प्रभावित है। ऐसे में किसी नई आर्थिक लागत के संभावित प्रभाव की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने छोटे व्यापारियों को डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत बताई, लेकिन उनकी लागत बढ़ने पर चिंता जताई।

PM-सीएम से हस्तक्षेप की मांग

दोनों नेताओं ने केंद्र सरकार से एमडीआर व्यवस्था की समीक्षा करने और छोटे एवं मध्यम व्यापारियों के हित में वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने की मांग की है। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उत्तर प्रदेश के व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं से जुड़ी इस चिंता को केंद्र सरकार के समक्ष उठाने का आग्रह किया है।

ऐरन दंपती ने कहा कि आम नागरिक पहले से ही कर, शुल्क और महंगाई का भार उठा रहा है। ऐसे में डिजिटल भुगतान से जुड़ी अतिरिक्त लागत बढ़ने पर उसका असर व्यापारिक लागत तक सीमित रहेगा या आगे उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा, इस पहलू पर व्यापक जनहित में विचार किया जाना चाहिए।

Azaz Ahmad Editor-in-chief